Hazratganj की शामों में एक अलग ही नज़ाकत होती है।
पुरानी इमारतों की रोशनी, सड़क किनारे चलती ठंडी हवा, और भीड़ में भी छुपी हुई तन्हाई।
लखनऊ का दिल कहा जाने वाला हज़रतगंज सिर्फ बाज़ार नहीं… एहसास है।
यहाँ लोग सिर्फ घूमने नहीं आते, कुछ लोग अपनी अधूरी कहानियाँ भी साथ लेकर आते हैं।
दिसंबर की ठंडी शाम थी।
सड़क पर हल्की धुंध उतर चुकी थी। दुकानों की चमकती लाइट्स और चाट की खुशबू पूरे माहौल को जिंदा बना रही थी।
अयान हाथ में कॉफी लिए धीरे-धीरे सड़क पर चल रहा था।
वो कई साल बाद लखनऊ लौटा था।
दिल्ली की नौकरी, भागती जिंदगी और अकेलेपन ने उसे बदल दिया था।
लेकिन हज़रतगंज… वो अब भी वैसा ही था।
उसी भीड़ में अचानक उसकी नजर एक लड़की पर जाकर रुकी।
सफेद शॉल, खुले बाल और हाथ में किताब।
अयान जैसे कुछ पल के लिए वहीं रुक गया।
“सना…?” उसके होंठों से अनजाने में निकला।
लड़की ने मुड़कर देखा।
और वक्त जैसे अचानक पीछे लौट गया।
वही आँखें।
वही मुस्कान।
सना धीरे-धीरे उसकी तरफ आई।
“इतने साल बाद भी पहचान लिया?”
अयान हल्का सा हँसा।
“कुछ चेहरे भूलने के लिए नहीं होते।”
दोनों कुछ सेकंड तक चुप रहे।
क्योंकि कुछ मुलाकातें शब्दों से ज्यादा दिल से महसूस होती हैं।
“कॉफी?” अयान ने पूछा।
सना मुस्कुरा दी।
“हज़रतगंज आएँ और कॉफी ना पिएँ… ऐसा हो सकता है क्या?”
दोनों पास के छोटे से कैफ़े में जाकर बैठ गए।
बाहर सड़क पर लोग घूम रहे थे। कोई हँस रहा था, कोई फोटो ले रहा था। लेकिन उनकी दुनिया जैसे उस टेबल तक सिमट गई थी।
“कैसे हो?” सना ने धीरे से पूछा।
अयान ने खिड़की के बाहर देखते हुए कहा —
“तुम्हारे जाने के बाद… या तुम्हें फिर मिलने के बाद?”
सना की मुस्कान हल्की पड़ गई।
कई साल पहले दोनों इसी शहर में मिले थे।
कॉलेज, शाम की चाय, किताबें और लंबी बातें।
धीरे-धीरे दोस्ती मोहब्बत में बदल गई थी।
लेकिन जिंदगी ने दोनों के रास्ते अलग कर दिए।
अयान नौकरी के लिए दिल्ली चला गया।
सना के घरवालों ने उसकी शादी तय कर दी।
और फिर… बातों का सिलसिला धीरे-धीरे खत्म हो गया।
“मैंने बहुत कोशिश की तुम्हें भूलने की,” सना ने धीमी आवाज़ में कहा।
अयान हँस पड़ा।
“और मैं भूल ही नहीं पाया।”
बाहर हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी।
हज़रतगंज की सड़कें बारिश में और खूबसूरत लगने लगी थीं।
सना खिड़की से बारिश देखते हुए बोली —
“जानते हो… मुझे आज भी बारिश में यहाँ घूमना पसंद है।”
“क्यों?”
“क्योंकि यहाँ हर मोड़ पर तुम्हारी याद मिल जाती है।”
अयान उसकी तरफ देखता रह गया।
कुछ प्यार खत्म नहीं होते…
बस वक्त के पीछे कहीं छूट जाते हैं।
“शादी…?” अयान ने धीरे से पूछा।
सना कुछ पल चुप रही।
फिर हल्की मुस्कान के साथ बोली —
“नहीं हुई।”
अयान हैरान रह गया।
“क्यों?”
सना ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा —
“दिल किसी और के पास था।”
उस पल जैसे कैफ़े की सारी आवाज़ें धीमी पड़ गईं।
बारिश अब तेज हो चुकी थी।
सना धीरे से हँसी।
“तुम अब भी वैसे ही देखते हो।”
“कैसे?”
“जैसे हर बात दिल से महसूस करते हो।”
अयान ने पहली बार बिना डर के उसका हाथ पकड़ लिया।
“और तुम अब भी वैसे ही लौट आती हो… जब मैं तुम्हें भूलने लगता हूँ।”
सना की आँखें भर आईं।
दोनों कैफ़े से बाहर निकल आए।
बारिश में भीगी हज़रतगंज की सड़कें चमक रही थीं।
रोशनी पानी में टूटकर बिखर रही थी।
चलते-चलते सना अचानक रुक गई।
“अगर उस वक्त हम अलग ना होते… तो?”
अयान मुस्कुराया।
“तो शायद आज भी यहीं घूम रहे होते।”
सना हँसते-हँसते रो पड़ी।
और उसी बारिश में…
हज़रतगंज ने फिर एक मोहब्बत को अपने आगोश में ले लिया।